फासले हमेशा रहेंगे हम दोनों में, क्योकि तुमने हमें ठीक से देखा ही नहीं, और न ही देखने की कोसिस की.
कुछ इस तरह से मेरे करीब हो तुम की मुझसे दूर नहीं जा सकते , वक़्त ही मुझे तुमसे दूर ले जायेगा.
इतनी दूर की तुम ढूंढोगे, उस चेहरे को जो मुड़ कर तुम्हे देखा करता था, उस परछाई को, जो साथ चला करता था.
कभी उन रास्तों पर अकेले चल कर देखना, हमारे कदमो की आहटे, आज भी वह दबी होंगी, और चाहं कर भी उन आहटों को सुन नहीं पाओगे तुम.
उस मोड़ पर शायद तुम्हे ऐसा लगे की प्यार दो इंसान एक दुसरे से करते है, और हमारी कहानी में, तुम्हारे हिस्से का भी प्यार मैंने ही किया.
Sunday, January 3, 2010
faasale
फासले कुछ ऐसे हुए की हम तुम क्या से क्या हो गए,
कुछ ऐसे की फूल समय से पहले ही मुरझा गए,
आँखों से बरसात बिना सावन ही आ गई,
हमारी दुनिया ही जैसे वीरान होती गई,
कोशिसे नाकाम होती गई, जुन्दगी शमशान होती गई,
तेरे आने और जाने में एक अरसा लगा,
तेरे आने की उम्मीद ने मुझे बंधे रखा.
सबर का बांध जर्जर होता गया, जैसे मेरी रूह को कोई लेता गया.
अस्तित्व को तरसती मेरे रिश्ते की डोर, आज भी लगता है क्यों तू हर ओर.
नहीं चाहती की वापस आ जाये तू, पर आज भी मेरा दिल तुझे चाहता है क्यों?
सवालों के सिलसिले में, किसी का भी जवाब नहीं मेरे पास,
नहीं समझ पति की ना होते हुए भी क्यों है तू इनता खास?
कुछ ऐसे की फूल समय से पहले ही मुरझा गए,
आँखों से बरसात बिना सावन ही आ गई,
हमारी दुनिया ही जैसे वीरान होती गई,
कोशिसे नाकाम होती गई, जुन्दगी शमशान होती गई,
तेरे आने और जाने में एक अरसा लगा,
तेरे आने की उम्मीद ने मुझे बंधे रखा.
सबर का बांध जर्जर होता गया, जैसे मेरी रूह को कोई लेता गया.
अस्तित्व को तरसती मेरे रिश्ते की डोर, आज भी लगता है क्यों तू हर ओर.
नहीं चाहती की वापस आ जाये तू, पर आज भी मेरा दिल तुझे चाहता है क्यों?
सवालों के सिलसिले में, किसी का भी जवाब नहीं मेरे पास,
नहीं समझ पति की ना होते हुए भी क्यों है तू इनता खास?
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