Sunday, January 3, 2010

tumhare hisse ka pyaar

फासले हमेशा रहेंगे हम दोनों में, क्योकि तुमने हमें ठीक से देखा ही नहीं, और न ही देखने की कोसिस की.
कुछ इस तरह से मेरे करीब हो तुम की मुझसे दूर नहीं जा सकते , वक़्त ही मुझे तुमसे दूर ले जायेगा.
इतनी दूर की तुम ढूंढोगे, उस चेहरे को जो मुड़ कर तुम्हे देखा करता था, उस परछाई को, जो साथ चला करता था.
कभी उन रास्तों पर अकेले चल कर देखना, हमारे कदमो की आहटे, आज भी वह दबी होंगी, और चाहं कर भी उन आहटों को सुन नहीं पाओगे तुम.
उस मोड़ पर शायद तुम्हे ऐसा लगे की प्यार दो इंसान एक दुसरे से करते है, और हमारी कहानी में, तुम्हारे हिस्से का भी प्यार मैंने ही किया.

1 comment:

Amit K Sagar said...

बेहतरीन लिखा है आपने.
जारी रहें. शुभकामनाएं.
[उल्टा तीर]