Thursday, December 6, 2007

thodi si bewafai

जब कभी भी मैंने तुझसे नजर हटाई ,
मेरे दिल ने जब भी कोई अनजानी आरजू जगाई,
मेरे प्यार ने क्यों दी मुझे दुहाई ,
तो सोचती हूँ ,
मेरे दिल ने कही तो की थोडी सी बेवफाई,
जब भी किसी अजनबी ने कोई उम्मीद जगाई,
कभी प्यार के बीते दिनों की किसी ने याद दिलाई,
और मेरे दिल ने कही किस्मत आजमाई,
तो मैं कहती हूँ ,
मेरे दिल ने भी की थोडी सी बेवफाई.
अनजाने रिश्तों की जब भी मैंने उम्मीद जगाई,
तेरे प्यार की कशिश भी जब मेरे कम न आई,
अकसर तेरे ख्यालो पर जब वक़्त ने लकीर बनाईं,
आज जनता है मेरा दिल,
मेने की तुझसे थोडी सी बेवफाई.
पुकारती हूँ, कही दूर भी नहीं है तेरी परछाई,
क्यों जब जिंदगी की साँझ ढली और तेरी याद आई,
क्यों किस्मत भी लगती ह मुझे अलसाई,
तो पुचाती हूँ खुद से,
क्यों की मैंने ये थोडी सी बेवफाई बेवफाईg

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