Thursday, December 6, 2007

ye duniya

आज क्या हुआ है मुझे ,....
उड़ाती जा रही हूँ सात घोडो के रथ पर सवार ,
ऊपर से दिख रहा है ...सब खुश है, कही नहीं है विकार ,
जरुरत से ज्यादा उची उठ चुकी हूँ ,....
दुनिया की नजरो से ओझल हो चुकी हूँ ,
कोई नहीं है जो कर रहा हो मेरा इन्तजार .
सब खुश है करने में लगे है ह्कुद के सपने साकार .
अचानक देखती हूँ.....कोई मुझे बुला रहा है,
मेरे न होने की बेचैनी का इन्तजार करा रहा है......
सोचा चली जाउ धरा पर कही वो थक हर न जाये ....
रागीं सपने सजा कर मेने सोचा उसको देखा जाये......
देखा तो धक्का सा लगा ....जिसे मैंने सोचा था अपना ,
वो भिकारी निकला...
वो भी सिर्फ अपना ही भला चाह रहा था ...
दोनों हंथो को उठा कर खुदा से कुछ मांग रहा था..........

1 comment:

shruti said...

Dnt temme , you wrote this