देखती हूँ ,एक पतंगा दिए के सामने उछाल रहा है ,
मेरा सारा ध्यान भंग कर रहा है,
सोचा पूछु उस शैतान से ,
क्यों रे !तेरी क्या बिसात है मेरे सामने ,
मसल दिया जायेगा नहीं तो जल्दी से भाग ले ,
तन कर खडा हूँ कहने लगा ,
आज तो कह दिया फिर कभी न कहना ,
तुमसे बलशाली हूँ कम न समझाना ,
एक बार कूद कर इधर जाऊंगा ,
एक बार कूद कर उधर जाऊंगा ,
तब में धुल झोंक मैं तो उड़ जाऊंगा ,
ता समझ में मेरी आया ,
उस चोटी सी काया न कितना चिडाया .
मेरा सारा ध्यान भंग कर रहा है,
सोचा पूछु उस शैतान से ,
क्यों रे !तेरी क्या बिसात है मेरे सामने ,
मसल दिया जायेगा नहीं तो जल्दी से भाग ले ,
तन कर खडा हूँ कहने लगा ,
आज तो कह दिया फिर कभी न कहना ,
तुमसे बलशाली हूँ कम न समझाना ,
एक बार कूद कर इधर जाऊंगा ,
एक बार कूद कर उधर जाऊंगा ,
तब में धुल झोंक मैं तो उड़ जाऊंगा ,
ता समझ में मेरी आया ,
उस चोटी सी काया न कितना चिडाया .