Sunday, January 3, 2010

tumhare hisse ka pyaar

फासले हमेशा रहेंगे हम दोनों में, क्योकि तुमने हमें ठीक से देखा ही नहीं, और न ही देखने की कोसिस की.
कुछ इस तरह से मेरे करीब हो तुम की मुझसे दूर नहीं जा सकते , वक़्त ही मुझे तुमसे दूर ले जायेगा.
इतनी दूर की तुम ढूंढोगे, उस चेहरे को जो मुड़ कर तुम्हे देखा करता था, उस परछाई को, जो साथ चला करता था.
कभी उन रास्तों पर अकेले चल कर देखना, हमारे कदमो की आहटे, आज भी वह दबी होंगी, और चाहं कर भी उन आहटों को सुन नहीं पाओगे तुम.
उस मोड़ पर शायद तुम्हे ऐसा लगे की प्यार दो इंसान एक दुसरे से करते है, और हमारी कहानी में, तुम्हारे हिस्से का भी प्यार मैंने ही किया.

faasale

फासले कुछ ऐसे हुए की हम तुम क्या से क्या हो गए,
कुछ ऐसे की फूल समय से पहले ही मुरझा गए,
आँखों से बरसात बिना सावन ही आ गई,
हमारी दुनिया ही जैसे वीरान होती गई,
कोशिसे नाकाम होती गई, जुन्दगी शमशान होती गई,
तेरे आने और जाने में एक अरसा लगा,
तेरे आने की उम्मीद ने मुझे बंधे रखा.
सबर का बांध जर्जर होता गया, जैसे मेरी रूह को कोई लेता गया.
अस्तित्व को तरसती मेरे रिश्ते की डोर, आज भी लगता है क्यों तू हर ओर.
नहीं चाहती की वापस आ जाये तू, पर आज भी मेरा दिल तुझे चाहता है क्यों?
सवालों के सिलसिले में, किसी का भी जवाब नहीं मेरे पास,
नहीं समझ पति की ना होते हुए भी क्यों है तू इनता खास?

Thursday, December 6, 2007

एक पतंगा


देखती हूँ ,एक पतंगा दिए के सामने उछाल रहा है ,
मेरा सारा ध्यान भंग कर रहा है,
सोचा पूछु उस शैतान से ,
क्यों रे !तेरी क्या बिसात है मेरे सामने ,
मसल दिया जायेगा नहीं तो जल्दी से भाग ले ,
तन कर खडा हूँ कहने लगा ,
आज तो कह दिया फिर कभी न कहना ,
तुमसे बलशाली हूँ कम न समझाना ,
एक बार कूद कर इधर जाऊंगा ,
एक बार कूद कर उधर जाऊंगा ,
तब में धुल झोंक मैं तो उड़ जाऊंगा ,
ता समझ में मेरी आया ,
उस चोटी सी काया न कितना चिडाया .

thodi si bewafai

जब कभी भी मैंने तुझसे नजर हटाई ,
मेरे दिल ने जब भी कोई अनजानी आरजू जगाई,
मेरे प्यार ने क्यों दी मुझे दुहाई ,
तो सोचती हूँ ,
मेरे दिल ने कही तो की थोडी सी बेवफाई,
जब भी किसी अजनबी ने कोई उम्मीद जगाई,
कभी प्यार के बीते दिनों की किसी ने याद दिलाई,
और मेरे दिल ने कही किस्मत आजमाई,
तो मैं कहती हूँ ,
मेरे दिल ने भी की थोडी सी बेवफाई.
अनजाने रिश्तों की जब भी मैंने उम्मीद जगाई,
तेरे प्यार की कशिश भी जब मेरे कम न आई,
अकसर तेरे ख्यालो पर जब वक़्त ने लकीर बनाईं,
आज जनता है मेरा दिल,
मेने की तुझसे थोडी सी बेवफाई.
पुकारती हूँ, कही दूर भी नहीं है तेरी परछाई,
क्यों जब जिंदगी की साँझ ढली और तेरी याद आई,
क्यों किस्मत भी लगती ह मुझे अलसाई,
तो पुचाती हूँ खुद से,
क्यों की मैंने ये थोडी सी बेवफाई बेवफाईg

MAA GANGA

maa ganga

माँ गंगा
उसका महान रूप और अखंडता ,
निश्छल सौम्यता ,अतुलित शीतलता.
प्रेम की धरा सी निरंतित बहाना ,
कष्टों से परिपुरण मायानगरी सी धरती ,
उसे भी निस्वार्थ हंसते हुये सहना .
परिपूरन है परिमार्जित है ,
सृस्ठी के माथे पर अलंकृत है .
अभी भी अविजित अविक्रित रूप से बहती जा रही है ,
शंकर की जाता से निकली गंगा हूँ मैं यही समझा रही है .

जय माँ

ye duniya

आज क्या हुआ है मुझे ,....
उड़ाती जा रही हूँ सात घोडो के रथ पर सवार ,
ऊपर से दिख रहा है ...सब खुश है, कही नहीं है विकार ,
जरुरत से ज्यादा उची उठ चुकी हूँ ,....
दुनिया की नजरो से ओझल हो चुकी हूँ ,
कोई नहीं है जो कर रहा हो मेरा इन्तजार .
सब खुश है करने में लगे है ह्कुद के सपने साकार .
अचानक देखती हूँ.....कोई मुझे बुला रहा है,
मेरे न होने की बेचैनी का इन्तजार करा रहा है......
सोचा चली जाउ धरा पर कही वो थक हर न जाये ....
रागीं सपने सजा कर मेने सोचा उसको देखा जाये......
देखा तो धक्का सा लगा ....जिसे मैंने सोचा था अपना ,
वो भिकारी निकला...
वो भी सिर्फ अपना ही भला चाह रहा था ...
दोनों हंथो को उठा कर खुदा से कुछ मांग रहा था..........

Tuesday, September 18, 2007

किस्मत

आँखों की किस्मत मे न था वो नजारा ,
तुम ही क्या कोई भी न रहा हमारा ,
दिखाई नही देती कोई रोशनी भी अब तो ,
हुए अशियानो का हर तरफ़ है नजारा ,
सुनाने को तैयार नही फरियाद हमारी ,
वो हर किसा का खुदा भी न रहा हमारा ,
सोचते थे जिसकी बाँहों मे गुजर जाए ये जिन्दगी ,
पर बेवफा निकला हमसफ़र हमारा

दिव्या